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जमशेदपुर/डेस्क: जमशेदपुर से करीबन 75 किलोमीटर दूर चाकुलिया प्रखंड में स्थित भोली बोगी गांव जो आदिवासी बहुल गांव है. करीबन 50 घरों के इस गांव में सिर्फ आदिवासी लोग ही रहते हैं. इस गांव में पद्मश्री जमुना टुडू ने वन रक्षा समिति बनाई है. ये सभी महिलाएं जंगल की रक्षा करती हैं और जंगल से गंगू पत्ता चुनकर लाती हैं. इस पत्ता को यहां की महिलाएं अपने घर पर लाकर उसे अच्छी तरीका से साफ करती हैं, फिर इस पत्ते पर कटिंग कर टोपी का आकार देती है.
बरसात और गर्मी में होता है टोपी का उपयोग
महिलाओं का कहना है कि टोपी बनाने की ट्रेनिंग कहीं से नहीं ली. पुरखों से आदिवासी समाज के लोग खेतों में काम करने के लिए जाने के वक्त बरसात के दिनों में और गर्मी के दिनों में इस तरह का टोपी का उपयोग करते हैं. इस टोपी की खासियत यह होती है कि बरसात के दिनों में अगर खेत में काम करते वक्त बिजली गिर जाए तो इस पर कोई असर नहीं पड़ता है और गर्मी के दिनों में तेज लहर रहने के बावजूद भी इस टोपी पर कोई असर नहीं पड़ता है. यह टोपी ग्रामीणों की लाइफ लाइन कही जाती है.
पद्मश्री जमुना टुडू करती हैं ग्रुप का नेतृत्व
गांव आदिवासी बहुल है, इसलिए महिलाएं खाली समय में जंगल से लाये पत्तों का टोपी बनातीं हैं. इस छोटे से गांव में चार ग्रुप काम करती हैं. इन चारों ग्रुप का नेतृत्व पद्मश्री जमुना टुडू करती हैं. उनकी देखरेख में यह टोपी बनाई जाती है. जमुना टुडू का कहना है कि एक टोपी 100 से 150 रुपए में बिकता है. अगर इन्हें अच्छा बाजार मिल जाए तो इन्हें घर बैठे एक रोजगार का साधन मिलेगा. इस टोपी की खासियत एक और है कि एक बार यह टोपी बन जाए तो कम से कम 5 साल तक यह खराब नहीं होता. ग्रामीण इस टोपी का उपयोग काफी करते हैं. गोंग पत्ता की बनी यह टोपी ग्रामीणों के लिए एक वरदान जैसी है.