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रांची/डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनके बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए देशभर में सिविल क्षेत्र के अंतर्गत 57 नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) खोलने को मंजूरी दी है. 57 नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना के लिए 5862.55 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जो 2026-27 से नौ वर्षों की अवधि को कवर करेगी. इसमें 2585.52 करोड़ रुपये (लगभग) का पूंजीगत व्यय और 3277.03 करोड़ रुपये (लगभग) का परिचालन व्यय शामिल है. उल्लेखनीय है कि पहली बार इन 57 केंद्रीय विद्यालयों को बाल वाटिका, यानी बुनियादी चरण (प्री-प्राइमरी) के 3 वर्षों के साथ मंजूरी दी गई है.
भारत सरकार ने रक्षा और अर्धसैनिक बलों सहित केन्द्र सरकार के स्थानांतरणीय और गैर-स्थानांतरणीय कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरे देश में एक समान मानक की शैक्षिक सुविधाएं प्रदान करने हेतु नवम्बर 1962 में केंद्रीय विद्यालयों की योजना को मंजूरी दी थी. परिणामस्वरूप, "केंद्रीय विद्यालय संगठन" को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक इकाई के रूप में शुरू किया गया था.
नए केंद्रीय विद्यालय खोलना एक निरंतर प्रक्रिया है. मंत्रालय और केवीएस को नए केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों सहित विभिन्न प्रायोजक प्राधिकरणों से नियमित रूप से प्रस्ताव प्राप्त होते हैं. अब तक 1288 कार्यात्मक केंद्रीय विद्यालय हैं, जिनमें से 3 विदेशों में हैं-मास्को, काठमांडू और तेहरान. 30.06.2025 तक छात्रों का कुल नामांकन 13.62 लाख (लगभग) है.
पहले स्वीकृत 85 केंद्रीय विद्यालयों के साथ, यह तात्कालिक प्रस्ताव पुरे भारत में विस्तार के साथ संतुलन बनाते हुए केंद्रीय विद्यालयों की उच्च मांग को पूरा करता है. सीसीईए ने गृह मंत्रालय द्वारा प्रायोजित 7 केंद्रीय विद्यालयों और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों द्वारा प्रायोजित शेष 50 केंद्रीय विद्यालयों को मंजूरी दी है. केंद्रीय विद्यालयों के लिए 57 नए प्रस्ताव कम सेवा वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं. यह प्रस्ताव एक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो समावेशिता और राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने के लिए उत्तर, दक्षिण और पश्चिम में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए पूर्व में विकास को बढ़ावा देता है. दिसंबर 2024 में स्वीकृत 85 केंद्रीय विद्यालयों के साथ आगे बढ़ते हुए, इस प्रस्ताव में 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया जा रहा है. इन 57 केंद्रीय विद्यालयों में से 20 ऐसे जिलों में खोले जाने का प्रस्ताव है, जहां केन्द्र सरकार के कर्मचारियों की अच्छी-खासी संख्या के बावजूद वर्तमान में कोई केंद्रीय विद्यालय नहीं है. इसके अलावा, आकांक्षी जिलों में 14 केवी, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में 4 केवी तथा पूर्वोत्तर/पहाड़ी क्षेत्रों में 5 केवी प्रस्तावित हैं.
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