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रांची/डेस्क: 15 अक्टूबर से UPI से लेनदेन पर लगने वाले MDR शुल्क को लेकर जो भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है, उस पर केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है. वित्त मंत्री ने UPI भुगतान पर बनी भ्रम की स्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि 2000 रुपये से अधिक लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क कोई सरकारी टैक्स नहीं है. यह कोई सेस और सरचार्ज भी नहीं है. MDR शुल्क लगने के बाद यह सरकार के खाते में भी नहीं जाएगा. यह सिर्फ MDR शुल्क है जिसे व्यापारी को उठाना है और ग्राहकों पर कोई बोझ नहीं डाला गया है. MDR की पूरी व्यवस्था NPCI, बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर के बीच की है और इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ही यह शुल्क लिया जा रहा है.
वित्त मंत्री ने कहा कि MDR की व्यवस्था डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए की गई है. आने वाले दिनों में व्यापारी क्रेडिट कार्ड की तरह ही इस शुल्क का प्रबंध कर पाएंगे. वे ग्राहकों को ऑफर के जरिए छूट दे सकेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ताओं को इसे लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है. व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रखा गया है.
क्या है MDR और उसका ढांचा
- पर्सन टू मर्चेंट लेनदेन पर 2000 रुपये तक कोई शुल्क नहीं.
- 2000 से अधिक राशि पर 0.40 प्रतिशत तक MDR शुल्क लगेगा.
- MDR की अधिकतम राशि 300 रुपये निर्धारित है चाहें कितनी भी बड़ी राशि की व्यापारिक लेन-देन की गई हो.
- MDR का नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू हो सकता है.
अभी भी कुछ पहलुओं पर फैसला होना शेष है
- 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर GST किस हिसाब से लगेगा इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है.
- सम्भावना है कि MDR पर 18 प्रतिशत GST लगाया जा सकता है.
- GST परिषद की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में GST से जुड़े मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है.
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