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रांची/डेस्क: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल बरनवाल ने उठाए गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को घोषणाओं के बजाय मरीजों को जमीन पर सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर राज्य के बड़े सरकारी अस्पतालों तक मरीजों और उनके परिजनों को घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल
गिरिडीह के देवरी की हालिया घटना में कीचड़ भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस मरीज तक नहीं पहुंच सकी और ग्रामीणों को मरीज को खटिया पर रखकर लगभग एक किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा. दूसरी ओर, 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों से शिकायतें सामने आई हैं. स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में कई एंबुलेंस के खराब होने और कुछ वाहनों में ऑक्सीजन तथा जरूरी उपकरणों की कमी की रिपोर्ट सामने आई है.
बाइक एंबुलेंस का जोर-शोर से हुआ था उद्घाटन
बाइक एंबुलेंस का जोर से उद्घाटन किया गया था और यह कहा गया था कि जहां बड़े एंबुलेंस नहीं जा पाएगी वहां यह सुविधा दी जाएगी परंतु आज ऐसा लग रहा है कि वह भी हवा हवाई हो गई और सिर्फ कमीशन और घोटाले में ही सरकार फस गई, ग्रामीणों को सुविधा देने से यह सरकार पूरी तरह नाकाम हुई है .
RIMS और सरकारी अस्पतालों की स्थिति चिंता का विषय
भाजपा ने RIMS की व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा है. जुलाई 2026 में झारखंड हाईकोर्ट ने RIMS में नियुक्तियों, चिकित्सा उपकरणों की खरीद और जर्जर भवनों की मरम्मत में देरी पर नाराजगी जताई थी. वहीं, गोड्डा सदर अस्पताल में जरूरी दवाओं की कमी के कारण मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की खबर सामने आई है.
दवाओं और स्वास्थ्य खरीद व्यवस्था पर जवाबदेही की मांग
भाजपा ने स्वास्थ्य विभाग में दवाओं की खरीद और प्रबंधन को लेकर भी जांच की मांग की है. विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा उठाए गए सवालों में सरकारी गोदामों में जीवनरक्षक दवाओं के एक्सपायर होने तथा एंबुलेंस खरीद में कथित अनियमितताओं का मुद्दा शामिल है. इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है.
पार्टी का कहना है कि यदि सरकारी धन से खरीदी गई दवाएं मरीजों तक पहुंचने से पहले ही एक्सपायर हो जाएं, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. दवाओं की कमी के कारण कई मरीज दम तोड़ दिए हैं , कई परेशान है, परंतु सरकार बेपरवाह है.
घोषणाओं और जमीनी हकीकत में अंतर का सवाल
भाजपा ने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के दावे करती रही है, लेकिन जमीनी घटनाएं अलग तस्वीर दिखाती हैं. स्वयं मुख्यमंत्री ने जून 2026 में एंबुलेंस सेवाओं को लेकर घोषणा की थी और अधिकारियों को सरकारी अस्पतालों में इलाज, दवाओं तथा आपात सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए थे. वह अभी हवा हवाई हो गई
भाजपा ने सरकार से मांग की है कि एंबुलेंस की जिला-वार उपलब्धता, उनमें ऑक्सीजन एवं जीवनरक्षक उपकरणों की स्थिति, RIMS एवं सदर अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रक्रिया का सार्वजनिक ऑडिट कराया जाए और जहां भी अनियमितता मिले, वहां जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए.
भाजपा का स्पष्ट कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था का आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उस समय होना चाहिए जब किसी गरीब परिवार को आपात स्थिति में अपने मरीज को अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ती है, सरकार फेल हो जाती है .
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