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पलामू / डेस्क: जिस ब्रेकर का मकसद वाहनों की रफ्तार धीमी कर दुर्घटनाएं रोकना था, वही अब हादसे का कारण बनता नजर आ रहा है. पलामू जिले के मोहम्मदगंज अंचल क्षेत्र के सबनवा गांव के समीप मोहम्मदगंज-हैदरनगर मुख्य सड़क पर हाल में बनाए गए स्पीड ब्रेकर को लेकर सड़क सुरक्षा और निर्माण मानकों पर सवाल उठने लगे हैं. बीती रात इसी ब्रेकर के पास एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया. हादसे में चालक राजेंद्र मेहता (30) गंभीर रूप से घायल हो गए. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेदिनीनगर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया.
ब्रेकर बनाने का उद्देश्य वाहनों की गति नियंत्रित कर दुर्घटनाओं पर रोक लगाना होता है, लेकिन यहां ब्रेकर की बनावट और सुरक्षा संकेतों की कमी ही हादसे का कारण बनती दिखाई दे रही है. बताया जाता है कि ब्रेकर की स्लोपिंग कम है. फिलहाल सड़क के आधे हिस्से में ही ब्रेकर बनाया गया है. ब्रेकर पर स्पष्ट पेंट नहीं किया गया है और वाहन चालकों को पहले से सतर्क करने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया है. रात में ब्रेकर दूर से स्पष्ट दिखाई नहीं देने के कारण हादसे का खतरा बना हुआ है. राहगीरों के अनुसार, सड़क पर बनाए गए दो ब्रेकरों के बीच की दूरी भी काफी कम है. ऐसे में वाहन चालकों को एक ब्रेकर से निकलने के बाद दूसरे ब्रेकर तक संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पा रहा है.
क्या है निर्धारित मानक?
उपलब्ध तकनीकी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई करीब 10 सेंटीमीटर और चौड़ाई निर्धारित मानक के अनुसार होनी चाहिए. लगातार दो स्पीड ब्रेकरों के बीच 100 से 120 मीटर की दूरी का उल्लेख है. इसके अलावा वाहन चालकों को पहले से सावधान करने के लिए चेतावनी संकेत और स्पष्ट मार्किंग की व्यवस्था का भी प्रावधान बताया गया है.
IRC:99-2018 में भी स्पीड ब्रेकर के डिजाइन में उसकी प्रोफाइल, ऊंचाई, ग्रेडिएंट और लंबाई को महत्वपूर्ण बताया गया है. ऐसे में सवाल है कि सबनवा में बनाए गए ब्रेकर इन तकनीकी मानकों के अनुरूप हैं या नहीं.
अंचल अधिकारी ने कहा- प्रशासन करा रहा निर्माण
मोहम्मदगंज के अंचल अधिकारी रणवीर कुमार ने बताया कि प्रशासन की ओर से ब्रेकर का निर्माण कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसे अभी आधा बनाया गया है और पूरा सड़क पर बनाया जाएगा. सीओ ने ब्रेकर निर्माण स्थल पर जाकर स्थिति देखने की बात कही है. हालांकि, हादसे के बाद सवाल यह उठ रहा है कि निर्माण किस तकनीकी मानक और स्वीकृत डिजाइन के आधार पर कराया जा रहा है. दो ब्रेकरों के बीच वास्तविक दूरी कितनी है, उनकी ऊंचाई, चौड़ाई, गोलाई और स्लोपिंग निर्धारित मानक के अनुरूप है या नहीं और रात में उन्हें स्पष्ट दिखाई देने के लिए सुरक्षा संकेत क्यों नहीं लगाए गए, इसकी जांच जरूरी है.
लोगों ने संबंधित विभाग से ब्रेकर की ऊंचाई, चौड़ाई, गोलाई, स्लोपिंग, दोनों ब्रेकरों के बीच की दूरी और संकेतक व्यवस्था की तकनीकी जांच कराने की मांग की है. वहीं, चर्चा है कि जिस व्यवस्था का उद्देश्य दुर्घटनाएं रोकना है, वह स्वयं दुर्घटना का कारण न बन जाए. इसके लिए प्रशासन को ब्रेकर स्थल का निरीक्षण कर मानकों का पालन और जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित कराने की जरूरत है.
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