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रांची/डेस्क: पुलवामा आतंकी हमले के एक साल पूरे होने से पहले भारत पाकिस्तान को एक बार फिर झटका देने जा रहा है. सिंधु जल संधि को रद्द करके भारत पहले ही पाकिस्तान को पानी-पानी के लिए मोहताज कर चुका है, अब भारत जो नया प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है, उससे पाकिस्तान 'बिन पानी तरसने' की रही सही कसर भी पूरी हो जायेगी.
पाकिस्तान को अब तक यह खबर तो मिल ही चुकी होगी कि भारत जम्मू-कश्मीर में अपना 120 साल पुराना एक प्रोजेक्ट फिर से शुरू करने जा रहा है. इस खबर को सुनकर उसके हाथ-पांव भी फूल चुके होंगे. भारत 120 साल पुराने 'मोहरा पावर प्रोजेक्ट' फिर से शुरू करने जा रहा है। भारत इस पावर प्रोजेक्ट से देश के लिए बिजली पैदा करने और उधर इसका जोरदार झटका पाकिस्तान को जरूर लगेगा. जम्मू-कश्मीर की 120 साल पुराना यह हाइड्रोइलेक्ट्रिक सुविधा वाला पावर प्रोजेक्ट है.1990 के दशक से ही बंद पड़ी है. बता दें कि इस प्रोजेक्ट को सितंबर, 1992 में आई बाढ़ में भारी नुकसान पहुंचा था. जिसकेकारण इसे बंद करना पड़ा था.
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कर चुके हैं तैयारी
मोहरा पावर प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की जानकारी जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में खुद दी. उमर अब्दुल्ला,जिनके पास बिजली विभाग का प्रभार भी है, ने जम्मू-कश्मीर राज्य विद्युत विकास निगम के निदेशक मंडल से इस परियोजना को फिर से शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दे दिया है.
पाकिस्तान की कैसे लगेगी वाट
अब सवाल यह जेहन में उठता है कि मोहरा पावर प्रोजेक्ट शुरू होने से पाकिस्तान की वाट कैसे लगेगी. तो उसका सीधा उत्तर है कि मोहरा प्रोजेक्ट बारामुला जिले के उरी सेक्टर के बोनियार इलाके में स्थित है. यह पावर प्रोजेक्ट झेलम नदी पर बनेगा. झेलम भी वह नहीं है, जिसका पानी पाकिस्तान को भी मिलता रहता है. लेकिन इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद पाकिस्तान को पानी मिलने की सम्भावना या तो कम हो जायेगी या फिर खत्म हो जायेगी. इसलिए पाकिस्तान की इस प्रोजेक्ट शुरू होने से न सिर्फ वाट लगेगी, बल्कि उसकी खाट भी खड़ी हो जायेगी. क्योंकि सिंधु नदी का पानी नहीं मिलने से उसकी खेती और उसके हलक पहले ही सूख रहे हैं. वैसे भी पाकिस्तान की खेती का 80 प्रतिशत हिस्सा भारत की नदियों पर निर्भर है. सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान जाने से रुक जाये तो पाकिस्तान की खेती बर्बाद होना तय है.
खैर, यह पाकिस्तान की समस्या है, लेकिन भारत को इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से लाभ ही लाभ है. इस प्रोजेक्ट से भारत 11,000 मेगावाट बिजली उत्पादन करेगा. प्रोजेक्ट को शुरू करने का लक्ष्य 2035 रखा गया है.
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